ItihaasakGurudwaras.com A Journey To Historical Gurudwara Sahibs

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गुरुद्वारा सचखंड श्री हज़ूर साहिब जिला शहर नांदेड़ में स्थित है। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी 1708 में नांदेड़ आए थे। यहां से उन्होने बाबा बंदा सिंह बहादर जी को पंजाब मुगलों से जंग करने के लिये भेजा । एक दिन जब गूरू साहिब गोदावरी नदी के किनारे (गुरुद्वारा श्री नगीना घाट साहिब) बैठे थे, उन्होंने बताया कि यह स्थान उनकी तप स्थान था। प्राचीन काल में (दुशट दमन के रूप में)। लोगों ने गूरू साहिब से अनुरोध किया के उन्हें वह स्थान दिखाया जाए जहाँ वह पूजा करते थे। गूरू साहिब ने एक तीर चलाया और लोगों को बताया कि यह तीर जहाँ लगेगा वह उनका तप स्थान था। वह तीर इस जगह पर आकर लगा जहाँ अब गुरुद्वारा सचखंड श्री हज़ूर साहिब स्थित है। जब इस जगह को खोदा गया, तो यहां गूरू साहिब से संबंधित कुछ चीजें पाई गईं। एक दिन गुरू साहिब के दिवान में दो मुगल सिपाहीयॊं ने गुरू साहिब के उपर कटार के साथ वार किया । उस वार के साथ गुरू साहिब के गहिरा जखम हुआ जिस्कॊ एक अंग्रेज डाकटर की मदद से सिल दिया गया । वह जख्म धीरे धीरे ठीक होने लगा था लेकिन एक दिन तीर कमान चलाते वक्त वो जख्म फ़िर से खुल गिया जिस्को गुरू साहिब ने दुबारा सिलवाने से मना कर दिया । बाद में जब गूरू साहिब ने संगत से कहा कि वह इस दुनिया को छोड़ने वाले है, तो संगत ने गूरू साहिब से पूछा कि अगला गूरू कौन होगा। तब गूरू साहिब ने संगत से कहा कि अब से श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी उनके गुरु होंगे और उन्हे नम्सकार करके अगले गुरू के रूप गुरगद्दी सोंप दी

"आग्या भई अकाल की तबे चलायो पंथ || सब सिख को हुकम है गुरु मान्यो ग्रन्थ || "

बाद में श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने एक तम्बू लगवाया और उसमें चन्दन की चिखा जलवाकर 7 अक्टूबर 1708 को अपने घोड़े दिलबाग के साथ उस में प्रवेश कर गये और अपने स्वर्गीय निवास (परलोक गमन) के लिए रवाना हुए। महाराजा रर्ण्जीत सिंह ने इस सथान की सेवा करवाई



 
गुरुद्वारा साहिब, गुगल अर्थ के नकशे पर
 
 
  अधिक जानकारी :-
गुरुद्वारा श्री सचखंड हजूर साहिब, नांदेड़

किसके साथ संबंधित है :-
  • श्री गुरु गोबिंद सिंह जी

  • पता :-
    नांदेड़ शहिर
    जिला :- नांदेड़
    राज्य :- महाराष्ट्र
    फ़ोन नंबर:-0091-2462-243559, 234813, 241266,
    Fax : 024622-34812




     

     
     
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