ItihaasakGurudwaras.com A Journey To Historical Gurudwara Sahibs

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गुरुदवारा साहिब यां धर्मशाला गुरमत का प्रचार केन्द्र हैं । गुरुदवारा साहिब में श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी का प्रकाश होता है, श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी जो कि द्स गुरु साहिबान जी और भक्तों द्वारा रचित बाणी का संग्रह है । श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी सिखों के ११ (श्ब्द) गुरु हैं । जिसमें आत्मा और निरंकार का ज्ञान पदार्थ संगत को दिया जाता है । जिसको प्राप्त करके आत्मिक संतुष्टि मिलती है और सही राह पर चलने की प्रेणा मिलती है । गुरुदवारा साहिब एकता का प्रतीक हैं यहां पर किसी भी जाति, सभय्ता, रंग यां ध्रम के लोग आ कर ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं । गुरुदवारा साहिब में और भी सुविधायें होती हैं जैसे के, सराये (रहने के लिए),
ਜਿਥੇ ਜਾਇ ਬਹੇ ਮੇਰਾ ਸਤਿਗੁਰੂ,
ਸੋ ਥਾਨ ਸੁਹਾਵਾ ਰਾਮ ਰਾਜੇ
स्रोवर (इशनान करने के लिए ), लंगर ( पंगत में बैठ कर भोजन खाने के लिए ) । दुनिया में लाखों ही गुरुदवारा साहिब हैं । पर सबका इतिहास के साथ संबंध नहीं है । इतिहासक गुरुदवारा वेब्साईट सिर्फ़ उन गुरुदवारा साहिब को आपके सामने लेकर आए हैं जिनका कि इतिहास के साथ संबंध है । चाहे वे भारत में हों या पकिस्तान में ।

हमारा मुख्य उदेश उन तमाम इतिहासक गुरुदवारा साहिब जिन का संबंध सिक्ख ध्रम और इतिहास के साथ है उन को उजागर करके संगत के सनमुख पेश करना है । गुरुदवारा साहिब कहां सथित है, कौनसे गुरु साहिब यां भक्त के साथ संबंधित है, आदि जानकारी आपको इस वेब्साईट पर तसवीरों सहित मिलेगी, जो के संगत घर बेठै ही इन इतिहासक स्थानों का आनंद मान सकें और जो जानकारी इन के साथ संबंधित है वो आपको घर बेठै ही मिल जाए । इस वेब्साईट के द्वारा हम आपको गुरु साहिबान का संदेश और इतिहास बताने की छोटी सी कोशिश कर रहे है जो के आम लोग अपनी सभय्ता को समझ सकें और आने वाली पीढ़ी को समझा सकें । इस वेब्साईट में हमने गुरुद्वारा साहिब के साथ साथ इतिहासक संप्रदाओं को भी तस्वीरा सहित शामिल किया है ।
 
 
धयान देने योग्य:- गुरुद्वारा साहिब शुरु से ही सिखी का प्र्चार केन्द्र रहे हैं । इतिहासक स्थान हमें त्माम गुरु साहिबान भगतॊं के सिखी के लिए किए यतनों की याद करवाते हैं यां कह सकते हैं कि क्रियातम्क रुप की याद करवाते हैं ओर उन्की तरहां जीवन व्य्तीत करने की प्रेरत करते हैं । यह सिखी की ध्रोहर हैं जिन की संभाल करना सिखों का फ़्रज है । इस वेब्साईट की कोशिश ऎसे गुरुधामों को आप के सामने ले के आना है जो यां तो अर्थिक क्मी के कार्ण यां लाप्र्वाही के कार्ण खंड्र होने की क्गार पर खड़े हैं ।

नोट:- हम किसी तरह की कोई भेंट या आर्थिक सहायता की मांग नहीं कर रहे हैं। संगत के आगे यही बिनती है कि निम्न लिखित गुरुद्वारा साहिब की तसवीरों को देखें,यां खुद इन इतिहासक अस्थानों के दर्शन करके खुद फैसला लें, कि आप इन इतिहासक अस्थानों के लिए क्या कर सकते हैं । इन इतिहासक अस्थानों पर पहुचने में हम आपकी मदद के लिए हमेशा मौजूद हैं ।हमारा उद्देश्य इन अस्थानों की जानकारी संगत तक पहुचाने की है ।

अगर आप जी ने कोई भी आर्थिक मदद करनी हैं तो क पा करके गुरुद्वारा प्रंब्धक कमेटी से स्मंर्पक करें । इन अस्थानों का पता व फोन नंबर मौजूद हैं ।

गुरुदवारा श्री गिआन गोदड़ी साहिब, हरिदवार  १८ मार्च, २००९ को

गुरुदवारा श्री दमदमा साहिब, मंडी  १६ अगस्त, २००८ को

गुरुदवारा श्री जन्म असथान माता सुंदर कोर जी, बजवाड़ा   १९ जुलाई, २००८ को

गुरुदवारा श्री भविखतसर साहिब  २६ नवंबर, २००६ को

 
 
 
 
 
 
 

गुरुदवारा श्री मोती बाग साहिब, दिल्ली

रानी ने परख करने के लिए दासी का भेस बनाया पर गुरु साहिब जी ने झट से रानी को पहचान लिया और उसकी गोद में जाकर बैठ गए । उस समय उनकी ऊम्र ९ साल की थी । उस समय शहर में हैजा >>अधिक जान्कारी

 

गुरुदवारा श्री छटी पातशाही साहिब, परमपिला, उड़ी

गुरुद्वारा श्री जामनी साहिब, बजीदपुर

गुरुदवारा श्री गुरू तेग बहादर साहिब, भुपाल

गुरुदवारा श्री पातशाही नोवीं साहिब, भुपाल

गुरुदवारा श्री नानक पुरी साहिब, नांदेड़
 
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